चीन ने भारत पर आरोप लगाया है कि भारत डोकलाम क्षेत्र में अपनी सेना को भेजने को लेकर कई तरह के बहाने गढ़ रहा है. चीन ने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर वह सहनशीलता का परिचय दे चुका है. भारत और चीन 3500 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं. इस साल जून में भारतीय सेना ने भूटान के डोकलाम क्षेत्र में चीन का सड़क निर्माण रोका था, इसके बाद से ही दोनों देशों के बीच इस क्षेत्र को लेकर तनाव है.

चीन भारतीय सेना पर घुसपैठ का आरोप लगा रहा है वहीं भारत का कहना है कि वह एक छोटे देश यानी भूटान की सहायता कर रहा है. चीनी मीडिया लगातार भारत को युद्ध की धमकी दे रहा है. वहीं भारत भी अपने पक्ष पर बना हुआ है. चीन यदि डोकलाम क्षेत्र में सड़क निर्माण करता है तो भारत का चिकन नेक इलाका चीन की पहुंच में आ जाएगा और भारत की सुरक्षा पर बड़ा खतरा हो जाएगा.

चीन के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी किया है कि भारतीय सेना अब भी चीन के क्षेत्र में है और चीन ने इस मामले में पूरी सहनशीलता दिखाई है. चीन लगातार भारत से अपनी सेना वापस बुलाने के लिए कह रहा है. इस बयान में लिखा है, “लेकिन भारत ने इस संबंध में कोई कदम नहीं हुए हैं. वह तरह-तरह के बहाने गढ़ रहा है जिनका असल में कोई महत्व नहीं है.”

चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि चीन और ब्रिटेन की सरकारों के बीच 1890 में सीमा को लेकर समझौता हुआ था. इस बयान में कहा गया, “भारत का कदम चीनी क्षेत्र में कब्जे की गंभीर कार्यवाही होने के साथ-साथ क्षेत्रीय शांति के लिए एक बड़ी चुनौती है. नई दिल्ली की तरफ से इस संबंध में कोई रिस्पॉन्स नहीं दिया गया है. भारतीय अधिकारियों ने पहले कहा था कि दोनों तरफ के 300 जवान 150 मीटर की दूरी पर एक दूसरे के सामने खड़े हैं.”

चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि एक समय पर करीब 400 भारतीय सैनिक चीनी सीमा पर 180 मीटर तक अंदर घुस गए थे. जुलाई के अंत तक भारतीय सेना की 40 टुकड़ियां और एक बुलडोजर चीनी सेना में मौजूद है. मंत्रालय ने कहा, “इस घटना के बाद भारत ने अपने गैर कानूनी कदम को सही ठहराने के लिए कई बहाने गढ़े हैं, लेकिन भारत के दावों का कोई वास्तविक और कानूनी आधार नहीं है.”

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