कड़ी चाक-चौबंद सुरक्षा में रहने वाली देश की राजधानी दिल्ली में कहते हैं कि परिंदा भी पर नहीं मार सकता. लेकिन दिल्ली पुलिस की जनरल डायरी (जीडी) कुछ और ही कहानी बयां कर रही है. ऑर्म्स एक्ट 25 और आईपीसी 120ख से रंगी हुई दिल्ली के थानों की जीडी के मुताबिक दिल्ली अवैध हथियारों की एक बड़ी मंडी बन चुकी है, जहां बिहार के मुंगेर और मध्य प्रदेश (एमपी) के धार में बने हथियार राजधानी के रास्ते अन्य राज्यों में सप्लाई हो रहे हैं. कुछ अपवाद वाले दिन छोड़ दें तो हर सप्ताह दिल्ली में अवैध हथियार और उनके सप्लायरों को गिरफ्तार किया जा रहा है. आखिर मुंगेर और धार में बने हथियारों की ऐसी क्या है खासियत? इस पड़ताल पर रोशनी डालती है न्यूज18 हिन्दी की ये रिपोर्ट-

25-30 हजार में मिलती है 80 हजार रुपये वाली पिस्टल
मुंगेर और धार से आने वाली पिस्टल (माउजर) दिल्ली में 25 से 30 हजार रुपये में आसानी से मिल जाती है. जानकारों की मानें तो मुंगेर और धार में यही पिस्टल 12 से 15 हजार रुपये में बिकती है. 15 से 18 हजार रुपये का यही लालच हथियार तस्करों को इतनी दूर से ट्रेन के जरिए अवैध हथियारों की खेप दिल्ली लाने को मजबूर करता है. सूत्र बताते हैं कि जब मुंगेर और धार से इतनी बड़ी संख्या में पिस्टल दिल्ली नहीं आती थीं तो यही पिस्टल अपराधियों को 80 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक में मिलती थी. उस पर भी बड़ा काम ये कि हथियार तस्कर जानने वाले अपराधियों के जरिए ही पिस्टल अनजान लोगों को बेचा करते थे. किसी भी अनजान से तस्कर बात तक नहीं करते थे.

एक राउंड में यह दागती है 7- 8 गोलियां

छोटे-छोटे कारखानों में बनी इस पिस्टल की खासियत यह है कि एक बार में इस पिस्टल से 7 से 8 गोलियां तक दागी जा सकती हैं. उस पर सबसे बड़ी खासियत यह है कि फायरिंग करते वक्त गोली मैगजीन या नली में अटकती नहीं है. तीसरी खासियत यह है कि इसकी मरम्मत बड़ी ही आसानी से हो जाती है. यानी मरम्मत के लिए किसी बड़ी मिस्त्री की तलाश नहीं करनी पड़ती है. आमतौर पर तो तस्कर ये दावा करते हैं कि जल्दी ही पिस्टल में कोई खराबी नहीं आती है.

 पिस्टल के साथ फ्री मिलती है एक मैगजीन
अगर आपकी पिस्टल की एक मैगजीन खो जाए या फिर खराब हो जाए तो आपकी पिस्टल बेकार नहीं जाएगी. अवैध हथियारों के इस धंधे में भी फ्री वाली स्कीम चलती है. अगर आप मुंगेर या धार की बनी पिस्टल खरीदते हैं तो उसके साथ तस्कर आपको एक मैगजीन फ्री देते हैं. फिर चाहें आप एक पिस्टल खरीदिए या 99 आपको पिस्टल के बराबर ही मैगजीन भी दी जाएगी. एक बार में जुलाई 2013 में 99, जून 2014 में 30, सितम्बर 2014 20 पिस्टल पकड़ी गईं थी और छिटपुट मामलों में 5 से लेकर 15 तक पिस्टल पकड़ी जाती हैं. गौर करने लायक बात ये है कि पिस्टल की बड़ी खेप होने के बाद भी तस्कर उतनी ही मैगजीन साथ लेकर चलते हैं.

पिस्टल के लिए गोलियां भी बेचते हैं तस्कर
बिहार और मध्य प्रदेश के हथियार तस्कर पिस्टलों के साथ-साथ गोलियां भी सप्लाई कर रहे हैं. इस बात का खुलासा 23 फरवरी 2015 को हुआ था. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने तीन तस्करों को गिरफ्तार करते हुए उनके पास से 900 गोलियां बरामद की थीं. एक साथ 99 पिस्टल बरामद करने के बाद दिल्ली पुलिस के लिए ये एक और बड़ी कामयाबी थी. इसी घटना के बाद खुलासा हुआ था कि बदमाशों को पिस्टल सप्लाई करने के साथ ही गोलियां भी दिल्ली में बेची जा रही हैं.

ट्रेनों के जरिए दिल्ली लाई जाती हैं पिस्टल
बीते रविवार को दिल्ली पुलिस ने मोबई नाम की महिला को 14 पिस्टल के साथ पकड़ा है. कई और तस्कर पहले भी पकड़े जा चुके हैं. पकड़े गए तस्करों ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि बिहार और एमपी से दिल्ली तक पिस्टल लाने के लिए सबसे सुरक्षित रास्ता ट्रेन का है. ये तस्कर ट्रेन के जनरल डिब्बे में सफ़र करते हैं. हथियारों की पोटली को डिब्बे में यहां-वहां अपनी नजरों के सामने रखते हैं. हथियारों को अपने पास रखकर ये कभी सफ़र नहीं करते हैं. अगर डिब्बे में चेकिंग के दौरान हथियार पकड़े जाते हैं तो तस्कर कभी भी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ते हैं. एक बार दिल्ली पहुंचने के बाद उनके पकड़े जाने की संभावनाएं कम ही होती हैं.

2012 से दर्ज हो चुके हैं इतने मामले 
अवैध हथियारों के मामले में दिल्ली पुलिस के आंकड़ों पर निगाह डालें तो अब तक सैकड़ों अवैध हथियार दिल्ली पुलिस जब्त कर चुकी है. वर्ष 2012 में 1017, 2013 में 921, 2014 में 753 और 2015 में 700 मामले अवैध हथियारों की बरामदगी के दर्ज हुए थे. वहीं सूत्रों की मानें तो वर्ष 2016 में 775 और मई 2017 तक 371 हथियार दिल्ली पुलिस जब्त कर चुकी है.

दिल्ली से दूसरे राज्यों को होते हैंं सप्लाई
जानकारों का कहना है कि मुंगेर और धार के हथियार तस्कर पुलिस से बचने के लिए हथियारों की सप्लाई दिल्ली में करते हैं. दूसरे राज्य और जिलों की पुलिस के मुकाबले दिल्ली उनके लिए सबसे सुरक्षित जगह है. सूत्रों का कहना है कि दिल्ली में हथियार आने के बाद उसी दिन जिसके ऑर्डर पर हथियार आए हैं उसे भेज दिए जाते हैं. राजस्थान, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर में भी हथियार दिल्ली से ही सप्लाई किए जाते हैं.

हिन्दुस्तान का खैबर दर्रा है बिहार का मुंगेर
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बॉर्डर पर एक दर्रा है खैबर. कहा जाता है कि खैबर दर्रे में कुटीर उद्योग के रूप में घर-घर अवैध हथियारों का काम होता है. उसी तरह से मुंगेर को भी हिन्दुस्तान का खैबर दर्रा कहा जाने लगा है. यहां भी घर-घर अवैध हथियार बन रहे हैं. यही हथियार दिल्ली में सप्लाई हो रहे हैं. इस काम में बड़े, बच्चे और महिलाएं भी लगी हुई हैं.

सरकारी फैक्ट्रियों के ट्रेंड कारीगर बनाते हैं हथियार!
सूत्रों की मानें तो बिहार में करीब 30 से 35 सरकारी हथियार बनाने की फैक्ट्रियां थी. धीरे-धीरे ये फैक्ट्रियां मंदी की ओर चली गईं. कुछ बंद हो गईं तो कुछ में अब सिर्फ नाम के लिए थोड़ा बहुत काम हो रहा है. इन्हीं फैक्ट्रियों से रिटायर हुए या छंटनीशुदा कारीगर रुपयों के लालच में घरों में हथियार बनाने का काम करने लगे हैं.

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